Five Accused Acquitted in Mauli Jagran,

Mauli Jagran, Chandigarh चाकू-रॉड हमला केस में 5 आरोपी बरी, साक्ष्य साबित नहीं कर सका अभियोजन

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Five Accused Acquitted in Mauli Jagran,

जिला अदालत ने मौली जागरा में युवक पर चाकू और लोहे की रॉड से हमले के मामले में पांच आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार की अदालत ने कहा कि पुलिस और अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सके, इसलिए संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी किया जाता है।
मामला मौली जागरा थाना में 12 मई 2021 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें संजय, राहुल, गोपाल उर्फ सोनू, आशीष उर्फ आशु और साहिल के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 323, 307, 326, 506 और 149 के तहत केस दर्ज किया गया था।
एफआईआर के अनुसार 11 मई 2021 की रात करीब आठ बजे मौली कॉम्प्लेक्स स्थित मस्जिद के पीछे कुछ युवकों ने सुमित उर्फ विक्की पर हमला कर दिया। शिकायतकर्ता राजू कुमार ने पुलिस को बताया था कि सूचना मिलने पर जब वह मौके पर पहुंचा तो देखा कि संजय चाकू से, राहुल लोहे की रॉड से और गोपाल डंडे से विक्की पर हमला कर रहे थे, जबकि अन्य आरोपी उसे पकड़कर खड़े थे।
घायल विक्की को पहले सेक्टर-6 पंचकूला अस्पताल और बाद में जीएमसीएच-32, चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसके शरीर पर 11 चोटें पाई गईं, जिनमें तीन गंभीर थीं।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खुलासे के आधार पर चाकू, लोहे की रॉड और डंडा बरामद करने का दावा किया। मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया और ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 17 गवाहों को पेश किया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता और घायल के बयानों में कई जगह विरोधाभास है। एफआईआर भी देरी से दर्ज कराई गई और इसकी कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई। घायल ने यह भी स्वीकार किया कि उसे पहले किसी अन्य झगड़े में भी चोट लगी थी।
अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा बरामद दिखाए गए हथियार खुले स्थान से दिखाए गए और उस समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। साथ ही लोहे की रॉड और डंडे पर खून के निशान भी नहीं मिले तथा केस से जुड़े सामान और नमूनों को सुरक्षित रखने को लेकर भी स्पष्ट साक्ष्य सामने नहीं आए।
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में पेश किए गए साक्ष्य विश्वसनीय नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने पांचों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया और उनके जमानत बांड समाप्त कर दिए। साथ ही आदेश दिया कि यदि आरोपी राहुल किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे रिहा किया जाए।